
युवा लेखक सुरज कुमार दिनकर जी के कलम से
मईया सम्मान योजना से सशक्त होती झारखंड की गरीब ग्रामीण महिलाएं
Ranchi : झारखंड एक खनिज सम्पदा से परिपूर्ण राज्य होने के बावजूद आजतक गरीबी की मार झेल रहा है। यहां की अधिकांश आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर कर रही है। राष्टीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 43% आबादी गरीब है और इनके परिवार स्वस्थ के पैमाने में भी काफी निम्न हैं । लगभग 23%आबादी के पास अभी भी पक्के मकान नहीं हैं । पाकुड़, साहेबगंज, दुमका, लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम की स्थिति तो काफी बदतर है विकास के मामले में । सरकारों की असफल नीति और प्रशासनिक विफलता का नतीजा है की झारखंड राज्य बने 25 साल हो गए लेकिन अबतक आर्थिक रूप से यह संपन्न नहीं हो पाया है । यहां की राजनीति भी काफी अस्थिर रही है। रघुबर दास ने पहली बार बी जे पी की सरकार में 5 साल का कार्यकाल पूर्ण किया और फिर हेमंत सोरेन ने भी गठबधन की सरकार में 5 साल का कार्यकाल पूर्ण किए। साल 2024 के आखिरी में चुनावी घोषणा से पहले गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन ने मईया सम्मान योजना की घोषणा की जिसके तहत झारखंड की 18 साल से लेके 60 साल तक की लड़कियों व महिलायों को 1000 रुपए हर महीने देने का वादा के साथ योजना को लागू कर दिया। 2 महीने के बाद जब हेमंत सोरेन जेल से बाहर आके दुबारा से मुख्य मंत्री बने तो इस राशि को बढ़ाकर 2500 हर महीने कर दिए । अगस्त से अबतक 5 किश्त मईया सम्मान की राशि लाभुकों के खातों में जा चुका है। जनवरी और फरवरी की राशि अभी मिलना बाकी है । सरकार इसे अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजना मानती है और इस तरह का पुरे देश में पहला योजना है जिसमे की सभी तरह के लड़कियों व महिलाओं जिनको की किसी तरह की दूसरी पेंशन या सहायता राशि नहीं मिल रही थी वैसे महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा में तहत एक सम्मानजनक राशि हर महीने उनके बैंक खाते में सरकार भेज रही है । यह योजना वाकई में झारखन्ड जैसे गरीब राज्य की महिलाओं के लिए एक वरदान की तरह है । इससे न केवल वे अपनी जीविका चला पाएंगी बल्कि अपने बच्चों को पढ़ा भी पाएंगी । ग्रामीण इलाकों में जहां रोज़गार भी नहीं है वैसे इलाकों की महिलाएं पुरुषों दूसरे राज्य काम के तलाश में जाने को मजबूर हैं। ऐसे में इस तरह की एक सहायता राशि हर महिने उन्हें उनके दवा दारू व खान पान के लिए एक वरदान साबित होगी।
इस योजना का दूसरा सुखद पहलू यह भी है कि इसका लाभ लेने के लिए महिलाओं को किसी सरकारी ऑफिस के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। प्रज्ञा केंद्र से ऑनलाइन फॉर्म भर के अप्लाई कर दिए और हो गया। शुरुवात में तो मुख्यमंत्री का आदेश था समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारियों को की जो भी फॉर्म ऑनलाइन माध्यम से आ रहे हैं उन सभी को अपूर्व किया जाए । और ऐसा पहली बार हुआ की किसी तरह के पैसे (घूस) किसी भी सरकारी कर्मचारी को देना नहीं पड़ा । आज लगभग 55 लाख महिलाएं इस योजना में रजिस्टर्ड हैं और लाभ ले रही हैं । इसी के तर्ज में दिल्ली विधान सभा चुनाव में बी. जे. पी. ने भी 2500 हर महीने देने की घोषणा करी और जीत भी हासिल कर लिया ।
मईया सम्मान योजना यहां की महिलाओं को आत्मनिर्भर होने में भी काफ़ी मददगार साबित हो रही है । अब महिलाऐं को उनके घरों में इज्जत भी दिया जा रहा है और उनका मान समान भी बढ़ा है । 18 साल और उससे ऊपर की युवतियां भी अपने कॉलेज की फीस खुद से दे पा रही है और उच्च शिक्षा के अपने सपने को साकार कर पा रही हैं । मै मानता हुं की अगर सरकार ने इस योजना को सफलता पूर्वक 5 साल के अपने कार्यकाल तक चला लाया तो एक महिलाऐं के विकाश में एक मील का पत्थर साबित होगी । उन्हे आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका अड़ा करेगी ।