पेपर लीक की घटना से झारखण्ड के छात्रों का भविष्य हो रहा अंधकारमय

Frontline News Desk
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युवा लेखक, सूरज कुमार दिनकर

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झारखंड एकेडमी काउंसिल ने झारखंड बोर्ड के 10वी और 12वी की परीक्षाओं को 11 फरवरी से करने का घोषणा किया। सारे सब्जेक्ट अपने तय तिथि से हो रहे थे, 18 फरवरी को हिंदी की परिक्षा हुई तथा 20 को विज्ञान की परीक्षा होना था । लेकिन उसके पहले ही हिंदी व विज्ञान की परीक्षा के पेपर सोशल मीडिया में वायरल हो हुए । दरअसल 17 फरवरी को ही हिंदी का पेपर लीक हो गया था और विज्ञान का भी परिक्षा से एक दिन पहले ही पेपर लीक होकर कई व्हाट्स ऐप ग्रुप में शेयर हो रहा था । ऐसा ही एक ग्रुप कोडरमा के एक ग्रुप में भी शेयर किया जा रहा था जिसमें ग्रुप का एडमिन छात्रों से 350 रुपए लेके उन्हें क्वेश्चन पेपर का पीडीएफ फाइल उन्हें शेयर कर रहा था। अगले दिन जब मीडिया में यह ख़बर आई और उससे जब असली क्वेश्चन पेपर को मिलान किया गया तो शत प्रतिशत मैच हो गया। मतलब की वायरल क्वेश्चन पेपर फेक नहीं था बल्कि असली ही पेपर लीक हो गया था ।

बात मीडिया में आने के बाद छात्रों में बवाल खड़ा हो गया जिसके बाद बोर्ड के अध्यक्ष डॉ नटवा हसदा ने प्रेस कांफ्रेंस कर दोनो पेपर की परीक्षा को रद्द करने की घोषणा किया और इसकी जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया । झारखन्ड पुलिस के डी जी पी श्री अनुराग गुप्ता ने भी एक स्पेशल टीम बना के इसकी जांच शुरु करी । कोडरमा से तथाकथित व्हाट्स ग्रुप के संचालक जो एक निजी विद्यालय चलाता है उसको अरेस्ट किया गया और साथ ही 4 और संदेह के आधार पी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। कुछ माह पूर्व जे एस एस सी की परिक्षा के पेपर भी लीक हुए थे जिसकी जांच अभी भी सीआईडी कर रही है। उस टाइम पहली परिक्षा को रद्द कर दूसरी बार दुबारा से परिक्षा लिया गया और साथ ही परिक्षा के दौरान 4 घंटे पुरे राज्य में इंटरनेट सेवा भी बन्द कर दिया गया था , इसके बावजूद भी दुबारा से पेपर लीक हो गया । इन दोनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया की ऐसे गैंग या माफिया को सरकार और प्रशासन का कोई खौफ नहीं है। तभी इस तरह की घटनाए हो रही हैं । इस तरह के पेपर लीक की घटना ने यहां के छात्रों की भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है । सरकार और प्रशासन की बहुत बड़ी नाकामी कहने में कोई गुरेज नहीं होगा। तकरीबन 4.4 लाख छात्र 10 वी की परिक्षा दे रहे हैं । अब जब दोनो पेपर की परिक्षा रद्द हो गई तो सोचिए उन छात्रों पे इसका क्या मानसिक असर होगा। ए छात्र अपने करियर की पहली सीढ़ी चढ़ रहे हैं और पहली परिक्षा दे रहे हैं। ऐसे में कितना बुरा अनुभव हुआ होगा उन्हे । कितने हतोतशाही हुए होंगे। आखिर इन सब के लिए कैन जिम्मेदार है ?? इस तरह के अपराधों के लिए कोई कठोर कानून भी नहीं होने के वजह से अपराधी बेखौफ पेपर लीक जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं । पिछली बार जे एस एस सी के पेपर लीक में छात्रों में नौकरी के लिए सेटिंग के एवज में 25 से 30 लाख रुपए लेने के भी आरोप लगाए गए हैं । आखिर इतनी मोटी रकम किस तक पहुंची होगी?? कौन कौन से अधिकारी इसमें लिप्त हैं?? कौन से मंत्री इसमें शामिल हैं?? पुख्ता जांच होने पर ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे। लेकिन अब ऐसा लगता है की वाकई झारखन्ड में छात्रों का भविष्य चौपट है । समय पे एग्जाम नहीं हो पा पाना, समय पे सिलेबस पूरा न हो पाना, और अगर परीक्षा हुआ भी तो पेपर लीक हो जाना । आज झारखंड का पुरे देश में चर्चा हो रहा है ।


मेरा आग्रह माननीय मुख्य मंत्री श्री हेमन्त सोरेन से होगा की महोदय इस तरह के घटनाओं पे कड़ी करवाई करें और ऐसी कठोर सजा दी जाए की फिर कभी कोई गैंग कोई माफिया इस तरह के पेपर लीक करने की हिम्मत नहीं करे । साथ ही इसमें सम्मिलित सरकारी कर्मचारी को भाई कठोर दंड दिया जाए । आप इस राज्य के मुखिया होने के नाते निष्पक्ष परिक्षा हो इसको सुनिश्चित करें।

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